मतदाता दिवस 2026: "नागरिक केंद्र में" थीम को वास्तविकता में बदलने की चुनौतियाँ

 हर वर्ष 25 जनवरी को विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र देश भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। मतदान का अधिकार नागरिक की राजनीतिक स्वतंत्रता का सर्वोच्च अधिकार है। 2011 से गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले मनाया जाने वाला यह दिवस नए मतदाताओं को पहचान पत्र प्रदान करने और मतदाता सूची के शुद्धिकरण का उद्देश्य रखता है। 

भारत निर्वाचन आयोग 1950 से ही इस विविधतापूर्ण देश में अपनी कर्मठता से दायित्व निभा रहा है।लोकतांत्रिक देशों में सत्ता पक्ष पर शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप आम है, जो विश्वव्यापी समस्या है। इस वर्ष 2026 की थीम "भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में नागरिक" है। लेकिन हालिया घटनाक्रम इसे चुनौती देते हैं। बिहार चुनावों में एसआईआर (स्पेशल इंसेंटिव रिव्यू) पहल पर सवाल उठे। थीम के बजाय "प्रमाणित करो, तुम मतदाता हो" अधिक प्रासंगिक होती। प्रमाण मांगना गलत नहीं; रिकॉर्ड सुधारना आवश्यक है। पर सवाल है—क्या हमारा डेटाबेस मजबूत है? 2003 के एसआईआर के बाद की समस्याएं 2053 में दोहराई जा सकती हैं। निर्वाचन आयोग को सुनिश्चित करना होगा कि कोई नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। 

हालिया मुंबई महानगरपालिका चुनाव में पढ़े-लिखे व संभ्रांत मतदाताओं वाले केंद्रों पर मतदान प्रतिशत सबसे कम था। निर्वाचन आयोग को थीम को वास्तविक बनाने के लिए गहन चिंतन करना होगा। मात्र कार्यक्रम और शपथ से लोकतंत्र का केंद्र नागरिक नहीं बन सकता। हमें स्वयं प्रयास करना होगा, आयोग को मजबूत खड़ा होना पड़ेगा। 1952 के प्रथम आम निर्वाचन से अब तक आयोग ने प्रगति की है, किंतु इसे त्वरित गति से बेहतर करने की आवश्यकता है।मतदाता दिवस हमें जागृत करता है। मजबूत डेटाबेस, पारदर्शी एसआईआर और जागरूक नागरिक ही लोकतंत्र को सशक्त बनाएंगे। 

आइए, हम सभी स्वयं को प्रमाणित करें और वोट का सम्मान करें। तभी "नागरिक केंद्र में" साकार होगा।


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